Breaking News
Home / Uncategorized / सरकारी नौकरी के लिए नायक ब्राह्मण एवं ब्राह्मण ओझा बने गोंड

सरकारी नौकरी के लिए नायक ब्राह्मण एवं ब्राह्मण ओझा बने गोंड

गोंड जाति के फर्जी प्रमाणपत्रों पर केंद्रीय आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार मांगी रिपोर्ट

गोरखपुर, देवरिया, महाराजगंज, बस्‍ती, आजमगढ, मउ एवं बलिया जिलों में नायक ब्राह्मण एवं ब्राह्मण ओझा समुदाय के लोगों ने नौकरी प्राप्‍त करने के लिए गोंड जाति के फर्जी प्रमाणपत्र बनवाये.

लखनऊ : केंद्रीय जनजाति आयोग ने गोंड जनजाति के फर्जी प्रमाण पत्र बनाये जाने पर उत्‍तर प्रदेश सरकार से रिपोर्ट तलब की है। प्रापत जानकारी के अनुसार केंद्रीय जनजाति आयोग के सचिव ने उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍य सचिव को लिखे पत्र में कहा है कि आयोग के संज्ञान में आया है कि उत्‍तर प्रदेश के गोरखपुर, देवरिया, महाराजगंज, बस्‍ती, आजमगढ, मउ एवं बलिया जिलों में नायक ब्राह्मण एवं ब्राह्मण ओझा समुदाय के लोगों ने नौकरी प्राप्‍त करने के लिए गोंड जाति के फर्जी प्रमाणपत्र बनवा लिये हैं।

उक्त पत्र में मुख्‍य सचिव से पूछा गया है कि उत्‍तर प्रदेश में जनजातियों की संख्‍या एवं प्रतिशत क्‍या है? साथ ही गोंड जाति की जनसंख्‍या एवं उसके प्रतिशत के बारे में जानकारी मांगी गयी है। आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार से यह भी पूछा है कि नायक ब्राह्मण एवं ब्राह्मण ओझा समुदाय के कितने लोगों को गोंड जाति का प्रमाणपत्र जारी किया गया है। केंद्रीय आयोग ने उत्‍तर प्रदेश सरकार को कटघरे में लेते हुए जवाब तालाब किया है कि फर्जी प्रमाणपत्र प्राप्‍त करने वाले लोगों के खिलाफ सरकार ने क्‍या फौजदारी कार्यवाही की है अथवा उनके खिलाफ किस प्रकार की प्रशासनिक कार्यवाई की है।

उल्लेखनीय है की आयोग ने एक गैर-सरकारी संगठन NGO की ओर से दिए गए प्रतिवेदन के बाद इस प्रकरण पर संज्ञान लिया है।

About Satya Sodhak Rahi

Check Also

गुजरात की पाटन लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र जगदीश ठाकोर पड़ रहे भारी

23 अप्रैल को लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण का मतदान होगा इसी चरण में गुजरात …

2 comments

  1. रोहित सिंह नायक

    ये क्या चक्कर है।
    कहई तो नायक जाती SC में आती है, तो कही ब्राह्मण , उत्तराखंड में नायक राजपूत होते है , तो राजस्थान में बंजारे होते है।
    केई मुझे समझाए की ये सब क्या है, म खुद एक नायक हु और राजपूत जाती से सम्बंधित हु ।।
    लयकीन up में ब्राह्मण कैसे हो गए।
    ओर कही SC ,st me भी आते ह।
    केआई मुझे स्पष्ट रूप से बताये की ये सब क्या है।

  2. सर्व प्रथम यह जाने की नायक जातिसूचक शब्द नही है। जो अनेको समुदाय में यंत्र तंत्र देखी सुनी जाती है।जोभी उस समुदाय का नेतृत्व किया होगा, अथवा जो किसी काल मे सेना संचालित किए होंगे, किसी समुदाय का मुखिया रहे होंगे, उन लोगो को नायक कहागया होगा जो आज भी परंपरा रूप से अनेको समुदायों में देखा जाता है।
    कुछ नायक ब्राह्मण संवर्ग में भी आते है, ब्राह्मणों (सनाढ्य ब्राह्मणों में) का एक ऐसा समूह भी रहा, जो अपरिग्रही, मरणाशौच में भोजन न करनेवाले, अपने कुल धर्म मे परायण लोगो को नायक कहागया, जो एक विशेषण है, न कि कोई जाति।
    हम नायक है, पूर्वजो ने हमे यही बताया कि, हम सनाढ्य ब्राह्मण है कुछ सौ वर्ष पूर्व हम पश्चिमी क्षेत्र से लड़ाई में हारकर भाग कर आये, उस समय हमारे पूर्वज सैन्य वृत्ति में थे।
    आपात काल मे ब्राह्मणों ने भी शास्त्र उठाया था।अपने आपात काल मे हम नायको के पूर्वज जंगलो में शरण लिए, वहां वीर बंजारों के समूह में छिपे रहे, उन बंजारा लोगो के हमारे पूर्वजों की रक्षा की, उनकेसाथ लाडे भी शहीद भी हुए।प्रणाम है उन बंजारों को, जिनलोगों के कारण हमारा अस्तित्व बचा रहा।
    हम नायको की परंपरा आचार्य पुष्य मित्र शुंग से शुरू हुई, उन्ही के नेतृत्व में, हम ब्राह्मण लोग शास्त्र उठाये, उनमे जो जो एक एक गुल्म का नेतृत्व किया, उन्हें उस गुल्म का नायक कहागया ।
    यहां हम 2 प्रकार की जाति विभाजन देख रहे है-
    1. परंपरागत।
    2. सरकारी ।
    सरकारी दस्तावेजों में हम नायक, आज़ादी के पूर्व, कौम बिरहमन पेशा जमींदारी से जाने जाते रहे।
    आज़ादी केबाद,
    कभी OBC कभी BC आज ST होगये।

    मेरा प्रश्न ?
    क्या कभी हम नायको ने कभी प्रार्थना की की हमे ओबीसी, BC, या ST की लिस्ट में डाल जय? कभी नही।
    बहुत दिनोंतक तो पता ही नहर चला कि हम किस लिस्ट में है।
    पता तब चला जब जाति प्रमाणपत्र माँगा गया, और उसमें ST लिस्ट में नाम मिला।अब अभ्यर्थी किस जाति से अपना परिचय दे?
    जो लिस्ट में था, वैसा किया।
    अब इसमें नायको की क्या ग़लती है ? जो हाहाकार मचा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *