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ए.सी. लोकल चलाने के लिए बाऊंसर जरुरत नहीं, मजबूर है

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मुंबईपश्चिम रेलवे द्वारा इस साल के अंत तक मुंबई में पहली वातानुकूलित लोकल ट्रेन चलाने की तैयारी चल रही है लेकिन चिंता इस बात की है कि यात्रियों को नियंत्रित कैसे किया जाए? बहरहाल इस चिंता से मुक्ति पाने के लिए प्लैटफॉर्म पर बाउंसर रखने की योजना बनाई जा रही है।

एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार इस बात की गहरी संभावना है कि ट्रेन के दरवाजे पूरी तरह बंद हुए बिना भी यह ट्रेन चल दे। इस ट्रेन के दरवाजे ऑपरेट करने का लीवर मोटरमैन केबिन में है, जोकि मेट्रो रैक के जैसे पूरी तरह ऑटोमेटेड नहीं है। यदि ट्रेन का दरवाजा थोड़ा भी खुला रह गया, तो ए.सी. लोकल चलाना ही बेकार हो जाएगा।
बाउंसर जरूरत नहीं, मजबूरी है

मुंबई में 12 डिब्बों की लोकल ट्रेन की क्षमता होती है 3,504 यात्रियों को वहन करने की लेकिन पीक आवर्स में 5,300 यात्री भी एक 12 डिब्बे की ट्रेन में सफर करते हैं। यदि ऐसा ही कुछ ए.सी. लोकल के साथ हुआ, तो पूरा सिस्टम गड़बड़ा जाएगा। इसलिए भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बाउंसर रखने पड़ेंगे। एक अन्य अधिकारी के अनुसार बाउंसर हायर करने के लिए अलग से बजट की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में हो सकता है शुरुआती समय में रेलवे सुरक्षा बल द्वारा यह काम कराया जाए।

महिला बाउंसरों की भी होगी तैनाती

रेलवे अधिकारी ने बताया कि बाउंसर किसी स्थापित सेक्युरिटी कंपनी से हायर किए जाएंगे। ए.सी. लोकल में भी महिलाओं के लिए अलग से कोच आरक्षित रहेगा। ऐसे में महिलाओं को नियंत्रत करने के लिए महिला बाउंसरों की तैनाती होगी। अधिकारी के अनुसार ए.सी. लोकल का किराया साधारण से ज्यादा होगा, तो इसमें सफर करने वाले लोग भी थोड़े ऊंचे दर्जे के होंगे। जाहिर सी बात है ऐसे में बाउंसरों द्वारा नियंत्रित करने के लिए काफी संयम रखना पड़ेगा। इसीलिए प्रफेशनल बाउंसर हायर करने की योजना बनाई जा रही है।

ट्रायल जारी है

मुंबई का पहला ए.सी. लोकल रैक मध्य रेलवे द्वारा पश्चिम रेलवे को सौंप दिया जा चुका है। इस लोकल के पटरी पर ट्रायल भी जारी हैं। प्रतिदिन दिन में दो ट्रायल किए जा रहे हैं। अधिकारी के अनुसार एक ही रैक होने के कारण दिनभर में इसकी सीमित सेवाएं दी जाएंगी। इस ट्रेन को नॉन-पीक आवर्स में चलाए जाने की ज्यादा संभावना है। दूसरी ओर रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को कहना है कि एक ही ट्रेन होने के कारण सीमित लोगों को मौका मिलेगा इसलिए रेलवे को ‘पहले आओ, पहले पाओ’ की तर्ज पर टिकट या सीजन टिकट दिए जाने चाहिए। विरार से अंधेरी यात्रा करने वाले विमल जोशी बताते हैं कि यदि कोई यात्री ए.सी. लोकल का सीजन टिकट खरीदकर रखता है और निर्धारित समय से लेट हो जाएं, तो उसे अगली ट्रेन के लिए डेढ़-दो घंटे का इंतजार करना पड़ेगा। इसलिए रेलवे को दो-तीन रैक लाने के बाद ही सेवाएं शुरू की जानी चाहिए।

 

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