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निपाह वायरस नियंत्रण में, ज्यादा फैलाव नहीं : जेपी नड्डा

नई दिल्ली । केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि निपाह वायरस के फैलने की आशंका नहीं है. इस पर काबू करने के लिए कड़े उपाय किए गए हैं. मंत्रालय ने कहा कि ऐसा लगता है कि इस वायरस का प्रसार स्थानीय स्तर पर हुआ है.
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने शीर्ष अधिकारियों के साथ केरल की स्थिति की समीक्षा करने के बाद उन्हें केरल सरकार को इसकी रोकथाम और प्रबंधन में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया. स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि फिलहाल नौ लोगों का इलाज चल रहा है और कोझीकोड में कई अस्पतालों में विषाणु ग्रस्त मरीजों को अलग रखने के लिए विशेष वार्ड खोले गये हैं.
मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केन्द्र की एक विशेष केन्द्रीय टीम केरल में है और वह स्थिति की लगातार समीक्षा कर रही है. इस टीम ने उस घर का दौरा किया जहां पहली मौत की खबर आई थी और टीम को उस कुएं में कई चमगादड़ मिले जहां से परिवार पानी लेता था. सूत्रों के अनुसार कुछ चमगादड़ों को पकड़कर जांच के लिए ले जाया गया है ताकि इस बात की पुष्टि हो सके वे इस बीमारी का कारण हैं या नहीं. उधर मृतक के ख़ून और दूसरे सैम्पल पुणे में नेशनल वायरोलॉजी इंस्टिट्यूट को भेजे गए हैं। ज्ञात रहे कि निपाह वायरस से अब तक केरल में 13 मौतें हो चुकी हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़ निपाह वायरस तेज़ी से उभरता वायरस है, जो जानवरों और इंसानों में गंभीर बीमारी को जन्म देता है.
निपाह वायरस के बारे में सबसे पहले 1998 में मलेशिया के कम्पंग सुंगाई निपाह से पता चला था. वहीं से इस वायरस को ये नाम मिला. उस वक़्त इस बीमारी के वाहक सूअर बनते थे. लेकिन इसके बाद जहां-जहां निपाह वायरस के बारे में पता चला, इस वायरस को लाने-ले जाने वाले कोई माध्यम नहीं थे. साल 2004 में बांग्लादेश में कुछ लोग इस वायरस की चपेट में आए. इन लोगों ने खजूर के पेड़ से निकलने वाले तरल को चखा था और इस तरल तक वायरस को लेने जानी वाली चमगादड़ थीं, जिन्हें फ्रूट बैट कहा जाता है. इसके अलावा इस वायरस के एक इंसान से दूसरे इंसान तक पहुंचने की पुष्टि भी हुई और ये भारत के अस्पतालों में हुआ है.
इंसानों में निपाह वायरस इंफ़ेक्शन से सांस लेने से जुड़ी गंभीर बीमारी हो सकती है या फिर जानलेवा इंसेफ़्लाइटिस भी अपनी चपेट में ले सकता है.
इंसानों या जानवरों को इस बीमारी को दूर करने के लिए अभी तक कोई इंजेक्शन नहीं बना है. सेंटर फ़ॉर डिसीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक निपाह वायरस का इंफ़ेक्शन एंसेफ़्लाइटिस से जुड़ा है, जिसमें दिमाग़ को नुक़सान होता है. 5 से 14 दिन तक इसकी चपेट में आने के बाद ये वायरस तीन से 14 दिन तक तेज़ बुख़ार और सिरदर्द की वजह बन सकता है.

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