Breaking News
Home / मुम्बई / झुणका भाकर केंद्र से क्यों चिपके हैं सुनील यादव?

झुणका भाकर केंद्र से क्यों चिपके हैं सुनील यादव?

dddddd

भले ही राज्य सरकार ने झुणका भाकर केंद्र चलाने की पूरी परिकल्पना को 20 साल पहले ही रद्द कर दी हो लेकिन वार्ड क्रमांक 80 के नगरसेवक सुनील यादव के नाम से एलाट चकाला मेट्रो स्टेशन के पास स्थित झुणका भाकर केंद्र आज भी चल रहा है बल्कि यह कहना ज़्यादा सही होगा कि सुनील यादव इससे आज भी सारे कानूनों को ताक पर रख चिपके हुए है इसका मुख्य कारण है यहां से प्रतिदिन होने वाली असीमित कमाई। यह झुणका भाकर केंद्र एक ऐसे स्थान पर स्थित है जिसके आसपास चारों ओर स्थित बिल्डिंगों में बड़ी बड़ी कारपोरेट कम्पनियों के कार्यालय स्थित है। दिन के भोजन के लिए रोज़ हज़ारों कामगार झुणका भाकर केंद्र का रुख करते है। जिससे झुणका भाकर केंद्र पर प्रतिदिन इतनी कमाई होती है जिसकी कोई कल्पना भी नही कर सकता। एक तो यह कमाई तो दूसरी ओर भले ही झुणका भाकर केंद्र के नाम पर कुल 120 स्क्वायर फिट जगह का एलाटमेंट हुआ हो लेकिन आसपास की लगभग दुगुना ज़मीन पर यह झुणका भाकर केंद्र चल रहा है। यह ज़मीन जिस पर एलाटमेंट के साथ ही सुनील यादव का कब्ज़ा है आने वाले समय मे कितना मोटा फायदा देकर जाएगी इसकी सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है।

सुनील यादव राजनीतिक रूप से काफी प्रभावशाली हैं। वर्तमान में नगरसेवक के साथ साथ प्रभाग समिति के चेयरमैन हैं। बीएमसी का पूरा के पूर्व प्रभाग उनकी मुट्ठी में है ऐसे में उनसे सही और गलत का सवाल करने की हिम्मत कौन कर सकता है? यहां यह ध्यान देने वाली बात है कि सुनील यादव को नगरसेवक के रूप में कार्य करने के लिए बीएमसी द्वारा मानदेय और भत्ता दिया जाता है जोनलगभग प्रति माह 20 हज़ार के आसपास होता है। जनप्रतिनिधि अपने मानदेय के अलावा अन्य कोई सरकारी लाभ नही ले सकता इसका सीधा और सरल कानून है। पर सुनील यादव नगतसेवक पद के लिए मिलने वाले मानदेय के अलावा झुणका भाकर केंद्र चलाने का दोहरा लाभ ले रहे है।

आरटीआई कार्यकर्ता आतिश तिवारी जिन्होंने सारी जानकारी आरटीआई के ज़रिए निकाली उनका कहना है है कि झुणका भाकर का यह पूरा गोरखधंधा केवल झुणका भाकर केंद्र चलाने तक ही सीमित नही है बल्कि झुणका भाकर केंद्र की आड़ में सरकारी जमीन पर कब्जे का मामला है। सार्वजनिक पद पर बैठा कोई जनप्रतिनिधि यदि किसी सरकारी जमीन पर कब्जे की कोशिश करता है तो यह अनैतिक ही नही गैर कानूनी भी है।

आरटीआई कार्यकर्ता आतिश तिवारी की बातों में भले ही दम हो पर असली मुद्दा तो यह है कि इतने महत्वपूर्ण पद पर बैठे किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई कारवाई करना इतना आसान है? यदि आसान होता तो बीस साल पहले बंद हो चुकी योजना का लाभ अब तक कोई कैसे ले रहा होता। भले ही कानून सबके लिए बराबर है कानून के हथौड़े से कोई बच नही सकता लेकिन कानून का हथौड़ा चलाने की ज़िम्मेदारी किसकी है? उन्ही सरकारी अधिकारियों की जो हमेशा से सत्ता के आगे नतमस्तक रहते है। आज कम से कम के पूर्व की बीएमसी सत्ता तो सुनील यादव के हाथ मे है फिर उनके झुणका भाकर पर अवैध कब्जे पर कारवाई करेगा कौन??

About Satya Sodhak Rahi

Check Also

Prashant Gaikwad, Prashant Gaykwad

प्रशांत गायकवाड़ के लिए नियम और कानून है “पैरों की जूती”

जोगेश्वरी पश्चिम में फातिमा हॉस्पिटल के पास वैशाली नगर रोड पर स्थित वेस्टर्न आयल शॉप …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *